रविवार, 11 मार्च 2012

भारतवर्ष में ८० लाख ऐसे बच्चे है जिन्होंने विद्यालयों का मुह भी नहीं देखा






भारतवर्ष में ८० लाख ऐसे बच्चे है जिन्होंने विद्यालयों का मुह भी नहीं देखा कभी ..... इस संख्या का ४० % हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश और बिहार से है .... उत्तर प्रदेश में २० लाख ऐसे बच्चे है ...(ये सभी आंकड़े रिपोर्टो के अनुसार)
अब एक नज़र हम देखे यहाँ ....... निम्नतम स्कूली शिक्षा के लिए प्रति बालक/ बालिका एक वर्ष का व्यय ५००० रुपये आता है .... हालाकि बहुत से विद्यालयों में यह २५०० रुपयों से भी कम पड़ता ...है एक साल में ....
@@@ भारत में कुल असाक्षर ८० लाख बच्चो के प्रतिवर्ष शिक्षा का व्यय = ४००० करोड़ रुपये
केवल रास्त्रमंडल खेलो में सरकारी व्यय =३०००० करोड़ रुपये
इसका मतलब ये की भारत के सभी असाक्षर बच्चे रास्त्रमंडल खेल के पैसे से ७ साल तक शिक्षा प्राप्त कर सकते थे ..... क्या भारत निर्माण का मतलब केवल एक छलावा और दिखावा है .... अगर हमारे माननीय सरकारों के वोट बैंक षड़यंत्र और सब्सिडी, बेकार की योजनाये इत्यादि का खर्च जोड़ लिया जाए और सही दिशा में लगाया जाये तो भारत के लिए पूर्ण साक्षरता बहुत ही छोटा सा लक्ष्य है .... ज़रा सी कर्तव्यनिस्था भारत को पूर्ण साक्षर देश बनाने में सक्षम थी .......
@@@ उत्तर प्रदेश में कुल असाक्षर बच्चे २० लाख है ........ २० लाख बच्चो के प्रतिवर्ष के शिक्षा का व्यय आता है १००० करोड़ रुपये
अब हमारी सरकार के केवल लखनऊ के पार्क का खर्च देखे तो ये ही केवल ७०० करोड़ रुपये है .... अगर बेकार की और योजनाओं को जोड़ा जाये तो पता नहीं क्या हस्र होगा ..... उत्तर प्रदेश में कोई भी बच्चा "अनपढ़"होता ही नहीं ....
गलती किसकी है? गलती है हमारे देश के कमज़ोर क़ानून व्यवस्था की .... शायद आप में से बहुत इस बात को स्वीकार ना करे और मेरा विरोध करे लकिन एक कटु सत्य है "भारतवर्ष का सबसे इमानदार नेता भी केवल .....%( % i dont want 2 mention....lol ) इमानदार होता है , उसे ऐसा करना पड़ता है अपने आस पास के साथ सामंजस्य बैठाने के लिए .... वरना वो ......... कोई भी "नायक" का अनिल कपूर कैसे बन सकता है ? " जन्लोक्पाल बिल एक उम्मीद थी उस पर भी हमारे बीच के " कथित परम देशभक्तों" ने पानी फेरना शुरू कर दिया .... इन् लोगो ने ऐसा काम किया की इनके ही आने वाली नसले इन्हें गालिया देते फिरे की एक तो कानून था जन्लोक्पल जिस पर ..................................... " ..खैर छोडिये जो होगा उसके लिए हम प्रयास ही कर सकते है ..... नेताओं और राजनीतिक पार्टियों से तो भरोसा उठ गया ...... भाजपा और जनता दल युनाइतेद को देखना बाकी है ..... गुजरात और बिहार को देखकर उम्मीद जग जाती है ............... गुजरात और बिहार ने विकास के मामले में एक आदर्श स्थापित किया .....
फिर भी बात छोडो राजनेताओं की ... अगर हम साक्षर और सक्षम लोग ngo के द्वारा या खुद से अपने भारतवर्ष या उत्तर प्रदेश को पूर्ण साक्षर बनाने का प्रयास करे तो निश्चित रूप से हम सफलता प्राप्त कर सकते है ...याद रखिये
जब तक ज़िंदा हो जीते जी कुछ नेक कर जाओ
वरना ट्रेन से काटने वाले हज़ारो है जो खबर में नहीं आते .......
वन्दे मातरम् ... वन्दे भारत राष्ट्र .... जय हिंद

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