शनिवार, 27 अक्टूबर 2012

भारत (पुदुचेरी)


आज भी यहां फ्रांसिसी वास्तुशिल्प और संस्कृति देखने को मिल जाती है।
बंगाल की खाड़ी के पूर्व में स्थित केंद्रशासित प्रदेश है पुदुचेरी। भारत का यह प्रदेश करीब 300 साल तक फ्रांसिसी अधिकार में रहा। आज भी यहां फ्रांसिसी वास्तुशिल्प और संस्कृति देखने को मिल जाती है। पुराने समय में यह फ्रांस के साथ होने वाले व्यापार का मुख्य केंद्र था। आज अनेक पर्यटक खूबसूरत तटों और तत्कालीन सभ्यता की झलक पाने के लिए यहां आते हैं। केवल पर्यटन की दृष्टि से ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से भी यह स्थान बहुत महत्वपूर्ण है। इस कारण प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक यहां आते हैं।

पुदुचेरी के क्षेत्र में दक्षिण में फैले पुदुचेरी, कराईकल, माहे और यनाम के वे क्षेत्र शामिल हैं जहां पहले फ्रांसीसियों का शासन था। पांडिचेरी इस प्रदेश की राजधानी है जो कभी भारत में फ्रांस के निवासियों का मूल मुख्याणलय हुआ करता था। यह 138 वर्षों तक फ्रांसीसी शासन के अधीन रहा। और 1 नवंबर 1954 को भारत में इसका विलय हो गया। इसके पूर्व में बंगाल की खाड़ी और शेष तीन तरफ तमिलनाडु है। पांडिचेरी से लगभग 150 किलोमीटर दक्षिण में पूर्वी तट पर कराईकल है जबकि माहे पश्चिम मे केरल से घिरे पश्चिमी घाटों के मालाबार तट पर स्थित है। यहां पर कालीकट हवाई अड्डे से पहुंचा जा सकता है जो माहे से 70 किलोमीटर दूर है। यनाम आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले से सटा हुआ है और विशाखापत्तनम से 200 कि.मी. की दूरी पर है।


यहां की लगभग 24.37 प्रतिशत जनता कृषि और इससे संबंधित व्य वसायों में लगी है तथा इस क्षेत्र में 80.7 प्रतिशत कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधाएं उपलब्धं हैं। धान मुख्यस फसल है। दलहन उत्पांदन में दूसरे नंबर पर है। माहे क्षेत्र का यहां की पौध-संपत्ति में प्रमुख योगदान है। नारियल, सुपारी और मसाले भी यहां उगाए जाते हैं। यनाम में उगाई जाने वाली दालें, मूंगफली तथा मिर्च यहां की वर्षा आधारित मुख्या व्याहपारिक फसलें हैं।
कुल 7,982 औद्यौगिक इकाइयों द्वारा 2,177.78 करोड़ रु. के सकल निवेश से 93,044 लोगों को रोजगार मार्च 2008 तक प्रदान किया गया। इन औद्योगिक इकाइयों के उत्पाकदन का कुल मूल्य3 13,455.34 करोड़ रु. निकाला गया था।
वित्तीय वर्ष 2006-2007 ( मार्च 2007 तक) के दौरान निर्यात उन्मुलख इकाइयों द्वारा निर्मित विभिन्न  उत्पाुदों के संदर्भ में निर्यात का मूल्य  901.06 करोड़ रु. रहा।
यूरोपीय संघ से सहायता के तहत कई तालाबों का सुधार किया गया है। शंकर परनी और पेन्नायर नदियों पर अनेक स्थाुनों पर 8 बेड बांध बनाए गए हैं। उपरोक्तड के अतिरिक्त् भूतल को पुन: ठीक करने के लिए बेड बांध के निर्माण के अनिवार्य प्रस्ताधव अराटचिकुप्प म, पेम्बियार, सेलीपेट के संकेंद्रण बिंदु पर वाडुकुप्परम के मलातार में पुडुचेरी में तथा कराइकनाल के मुलइयार, प्रवाडानायार और वंजीर एवं विलानुर में पुल एवं बेराज निर्माण का कार्य प्रगति पर है।

केंदशासित प्रदेश पुदुचेरी की बिजली की जरूरतें केंद्र सरकार के बिजली उत्पागदन केंद्रों से अपना हिस्सास लेकर और पड़ोसी राज्यों  के बिजली बोर्डों - तमिलनाडु बिजली बोर्ड, केरल राज्यय बिजली बोर्ड से बिजली खरीदकर और पुदुचेरी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड, कराइकल से पूरी की जाती है। इस प्रदेश की कुल बिजली उपलब्धीता 396.58 मेगावॉट है।
पुडुचेरी के लोक निर्माण विभाग द्वारा विभिन्नध श्रेणियों की लगभग 677.525 कि. मी. सड़कों का रखरखाव किया जाता है। सड़कों के सुधार और पुलों के निर्माण का कार्य प्रगति पर है।

पुदुचेरी उपनगरीय क्षेत्रों में अवजल निकासी की एक योजना 4.48 करोड़ रूपये की लागत से चल रही है। सर्वेक्षण के बाद कराईकल में अंडर ग्राउंड ड्रेनेज स्कीकम पर काम चल रहा है। इस पर 34 करोड़ रूपये की लागत आएगी। सी.एस.एस. के अंतर्गत 2.47 करोड़ रूपये की लागत से भारती पार्क को पुनर्जीवित करने का प्रस्ताोव है। बढ़ती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए लाजपेट तथा डुबरेपेट में नए अवजल शोधन संयंत्रों को चलाया जा रहा है।

पर्यटन - पुदुचेरी में भारतीय और फ्रेंच संस्कृति की एक साथ दर्शन होते हैं। यहां के स्मारक इतिहास से रूबरू कराते हैं तो वहीं मंदिर मन को श्रद्धा से भर देते हैं।

श्री अरबिंदो आश्रम, पुडुचेरी
चेन्ननई के दक्षिण में 160 कि.मी. की दूरी पर‍ स्थित पुदुचेरी (तमिल में पोडुचेरी के नाम से जाना जाता है)। यह प्रारंभिक अठारहवीं सदी से फ्रांस का एक उपनिवेश रहा है। यह एक दिलकश भारतीय शहर है जिसमें सुद्र के अतिरिक्त. फ्रांस की सांस्कृशतिक विरासत के जीवंत नमूने तथा एक आश्रय मौजूद है। अन्यं फ्रांसीसी स्थ्लों—कराईकल (तमिलनाडु), माहे (केरल), यनाम (आंध्र प्रदेश), को मिलाकर पांडिचेरी केंद्रशासित प्रदेश बना है। इस नगर की खासियत यहां की सुनियोजित नगर योजना तथा फ्रांसीसी-तमिल वास्तुाकला का संगम है। यह शहर फ्रांस के 18 वीं सदी के किलेबंद समुद्रतटीय शहर ‘बास्टािइड के नमूने पर बना है।
पुदुचेरी का प्रसिद्ध संतों की भूमि के रूप में प्रसिद्ध होने, रोम तथा यूनान के साथ प्राचीन व्याचपारिक संबंध होने, फ्रांसीसी भारत की एक समय राजधानी होने तथा आध्याात्मिक शाक्ति को केंद्र होने का कारण पांडिचेरी के उथले पानी, नदियों, समुद्री तटों तथा दूसरे क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए प्रचुर पर्यटन संसाधन उपलब्धू है। पूर्व तथा पश्चिम संस्कृाति से प्रभावित पांडिचेरी में हस्त्शिल्प  से तैयार चमड़े की वस्तु एं, मिट्टी के बरतन, हाथ से तैयार कागज, धूप तथा पुराना औपनिवेशिक फर्नीचर आदि अनोखी वस्तुरएं मिलती हैं। हमारे पहले प्रधानमंत्री स्वेर्गीय पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पांडिचेरी को ‘फ्रांसीसी संस्कृमति की खिड़की’ कहा था।

ऑरोविले
महान संत, कवि तथा भारतीय आध्या त्मिकता के महान प्रवर्त्तक श्री अरविंद अपने जीवन के अंत तक अपनी दृष्टि तथा विचारों का प्रसार करते रहे। उनका आश्रम आज भी अपनी खास जीवन शैली के कारण विश्वव-भर से लोगों को आकर्षित करता है।
आध्यात्म की भूमि
जीवन की भागदौड़ से थक चुके लोग जो शांति व आध्यात्म की तलाश में हैं, उनके लिए पुदुचेरी बिल्कुल सही जगह है। प्राचीन काल से ही पुदुचेरी वैदिक संस्कृति का केंद्र रहा है। यह महान ऋषि अगस्त्य की भूमि है। पुदुचेरी की आध्यात्मिक  शक्ति 12वीं शताब्दी में और बढ़ी, जब यहां अरविदों आश्रम की स्थापना हुई। प्रतिवर्ष सैकड़ों लोग सुकून की तलाश में यहां आते हैं।

पेराडाइज बीच
यह बीच शहर से 8 किमी. दूर कुड्डलोर मेन रोड के पास स्थित है। इस बीच के एक ओर छोटी खाड़ी है। यहां केवल नाव द्वारा ही जाया जा सकता है। नाव पर जाते समय पानी में डॉल्फिन के करतब देखना एक सुखद अनुभव है। यहां का वातावरण देखकर इसके नाम की सार्थकता का अहसास होता है। यह वास्तव में स्वर्ग के समान है।

ऑरोविल्ले बीच
जैसा कि नाम से ही जाहिर है यह बीच ऑरोविल्ले के पास स्थित है। पुदुचेरी से 12 किमी. दूर इस तट का पानी अधिक गहरा नहीं है। इसलिए पानी में तैरने के शौकीनों के लिए यह बिल्कुल सही जगह है। सप्ताहांत में यहां वक्त बिताना लोगों को बहुत भाता है। उस दौरान यहां बहुत भीड़ रहती है। बाकी दिन यहां ज्यादा भीड़भाड़ नहीं होती।

पार्क स्मारक (आयी मंडपम)
पुदुचेरी के बीचों बीच स्थित यह सरकारी पार्क यहां का सबसे खूबसूरत सार्वजनिक स्थान है। यहां का मुख्य आकर्षण पार्क के केंद्र में बना आयी मंडपम है। इस सफेद इमारत का निर्माण नेपोलियन तृतीय के शासन काल में किया गया था। यह ग्रीक-रोमन वास्तु शिल्प का उत्कृष्ट नमूना है। इस जगह का नाम महल में काम करने वाली एक महिला के नाम पर रखा गया था। उस महिला ने अपने घर के स्थान पर एक जलकुंड बनाया था। कभी नेपोलियन ने यहां का पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई थी और वह इससे खुश होकर स्मारक का नाम आयी मंडपम रखा।

अरिकमेडु
यह ऐतिहासिक जगह पुदुचेरी के 4 किमी. दक्षिण में स्थित है। यह स्थानीय लोगों के रोमन कॉलोनियों के साथ व्यापार का प्रतीक है। यह व्यापार ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में होता था। यहां स्थानीय व्यापारी वाइन का आयात करते थे और इसके बदले में कपड़ा, बहुमूल्य रत्न और आभूषण निर्यात करते थे। अभी भी यहां 18वी. शताब्दी में निर्मित फ्रेंच जेसूट मिशन हाउस के खंडहर देखे जा सकते हैं। यह हाउस 1783 में बंद कर दिया गया था।

आनंद रंगा पिल्लई महल
जब यहां फ्रेंच का शासन था, तब आनंद रंगा पिल्लई पुदुचेरी के गवर्नर थे। उनके द्वारा लिखीं डायरियां 18वी. शताब्दी के फ्रेंच और भारत संबंध के बारे में जानकारी देती हैं। यह महल दक्षिणी भाग पर बची हुई कुछ प्राचीन इमारतों में से एक है। इसका निर्माण 1738 में किया गया था। इसका वास्तुशिल्प भारतीय और फ्रेंच शैली का अनूठा मिश्रण है।

डुप्लेक्स की प्रतिमा
फ्रेंकॉइस डुप्लेक्स पुदुचेरी के गवर्नर थे जो 1754 तक इस पद पर रहे। 1870 में इनके द्वारा किए गए कार्यो को देखते हुए इन्हें श्रद्धांजली अर्पित करने के उद्देश्य से दो प्रतिमाओं की स्थापना की गई थी। एक फ्रांस में और दूसरा पुदुचेरी में है। 2.88 मी. ऊंची ग्रेनाइट से निर्मित यह मूर्ति गौवर्ट एवेन्यू पर स्थित है।

विल्लन्नूर
श्री गोकिलंबल तिरुकामेश्वर मंदिर पुदुचेरी से 10 किमी. दूर है। दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव के दौरान यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। यह ब्रह्मोत्सव मई-जून के बीच मनाया जाता है। इस उत्सव में मंदिर के 15 मी. ऊंचे रथ को खींचा जाता है। हजारों भक्तों द्वारा रथ खींचे जाने का दृश्य अदभूत होता है। पुदुचेरी के उपराज्यपाल भी इस यात्रा में भाग लेते हैं। सर्वधर्म समभाव की प्रतीक यह यात्रा फ्रेंच शासन काल के दौरान भी होती थी। उस समय गवर्नर फ्रेंच स्वयं इस रथ को खींचते थे। इसके अलावा यहां 10 हैक्टेयर में फैली ऑस्टेरी झील है जहां पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।

पुदुचेरी के आसपास दर्शनीय स्थल
शिंजी

पुदुचेरी के उत्तर पश्चिम में स्थित विल्लुपुरम जिले में इस क्षेत्र का सबसे सुंदर और आकर्षक किला शिंजी है। 800 फीट ऊंचा यह विशाल किला तीन पहाड़ियों (राजगिरी, कृष्णागिरी और चंद्रायन दुर्ग) तक फैला है। किले का मुख्य हिस्सा राजगिरी पहाड़ पर है जो तीनों पहाड़ों में से सबसे बड़ा है। किले के अंदर अन्नभंडार गृह, शस्त्रागार, टैंक और मंदिर है। इसका प्रवेश द्वार कल्याण महल के सामने है। करीब 700 मी. की ऊंचाई पर एक पुल है जो किले को अन्य इमारतों से जोड़ता है। इतनी ऊंचाई से नीचे शिंजी नगर को देखना रोमांचित कर देता है। उचित शुल्क देकर आप इस ऐतिहासिक किले को करीब से देख सकते हैं।

चिदम्‍बरम
यह जगह पुदुचेरी के दक्षिण में राष्ट्रीय राजमार्ग 45ए पर स्थित है। चिदम्‍बरम शिव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यहां शिव की शुभनायक नटराज अवतार की पूजा होती हैं। इस मंदिर का निमार्ण 10वीं से 14वीं शताब्दी के बीच हुआ था। कहा जाता है कि 10वीं शताब्दी में चोल राजा परांतका प्रथम ने इस मंदिर को सोने से ढक दिया था जिसके बाद सूरज की रोशनी में मंदिर जगमगाता रहता था। मंदिर में शिवजी की अक्ष लिंगम रूप में भी पूजा की जाती है। 

(अरविन्द कु .पाण्डेय)

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