Suprabhat-aap hum & hamri soch

जिंदगी को बदलने में वक्त नहीं लगता पर वक्त को बदलने में जिंदगी लग जाती है- अरविन्द कु पाण्डेय

सोमवार, 26 दिसंबर 2011

ak soch

soch kabi nahi marti
 ye kahna tha dhruv deo pandeyji ka..
प्रस्तुतकर्ता Dhruvmemorial(suprabhat) पर 3:21 am कोई टिप्पणी नहीं:
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें

शनिवार, 12 नवंबर 2011

dhruv mamorel trest








प्रस्तुतकर्ता Dhruvmemorial(suprabhat) पर 11:47 pm 1 टिप्पणी:
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
स्थान: Deoria, Uttar Pradesh, India
नई पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें संदेश (Atom)

ब्लॉग आर्काइव

  • ►  2014 (7)
    • ►  मई (7)
  • ►  2013 (10)
    • ►  अगस्त (1)
    • ►  जुलाई (6)
    • ►  जून (1)
    • ►  फ़रवरी (1)
    • ►  जनवरी (1)
  • ►  2012 (164)
    • ►  दिसंबर (5)
    • ►  नवंबर (13)
    • ►  अक्टूबर (11)
    • ►  सितंबर (17)
    • ►  अगस्त (11)
    • ►  जुलाई (2)
    • ►  जून (2)
    • ►  मई (15)
    • ►  अप्रैल (23)
    • ►  मार्च (65)
  • ▼  2011 (2)
    • ▼  दिसंबर (1)
      • ak soch
    • ►  नवंबर (1)
      • dhruv mamorel trest

जय माँ विंध्यवासिनी

जय माँ विंध्यवासिनी

यह ब्लॉग खोजें

Popular Posts

  • कम मात्रा में 5-6 बार खाना सेहत को बेहतर
    बरसों तक दिन  में तीन बार खाने का सिस्टम बना रहा। फिर इसमें कुछ बदलाव आए और एक्सपर्ट्स ने दिन में तीन बार मेन मील (ब्रेकफास्ट, लंच और ...
  • (शीर्षकहीन)
    जोधपुर जोधपुर विवरण जोधपुर शहर, जोधपुर ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय, राजस्थान राज्य, पश्चिमोत्तर भारत मे...
  • मदनमोहन मालवीय
    महामना मदन मोहन मालवीय ( Madan Mohan Malaviya) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रणेता तो थे ही इस युग के आदर्श पुरुष भी थे। वे भ...
  • (शीर्षकहीन)
    क्यों लोगों को गाँधी पसंद नहीं है ? 1. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसं...
  • (शीर्षकहीन)
    By Dr Arvind Kumar During his recent visit to India, the UN Secretary-General Mr Ban Ki-moon said that he expected India to pl...
  • क्या स्त्री परजीवी है ??
    ------------------------------ -- न जाने क्यूं ----- बार बार ये प्रश्न गूंजता है मन में ---- स्त्री का अपना घर कौन सा है ??? ...
  • हृदयघात की संभावना को जन्म देता है शारीरिक शोषण
    ...
  • हाथ से फिसलता एक और संसाधन
    जल जीवन का एक महत्वपूर्ण तत्व है। इन तत्वों में से किसी के निजी स्वामित्व या व्यावसायीकरण की अवधारणा मानवता के हित में नहीं है। एक ऐस...
  • दीपावली
    दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति। दीपावली शब्द ‘दीप’ एवं ‘आवली’ की संधिसे बना है। आवली अर्थात पंक्ति, इस प्रकार दीपावली शब्द का ...
  • नदी नहीं हैं गंगा
    संस्कृति हैं गंगा: गंगा – यह एक शब्द नहीं, नदी नहीं, जलधारा नहीं, सिंचाई साधन नहीं, बल्कि एक संस्कृति है। संस्कृति की यह पहचान ह...

कुल पेज दृश्य

सुप्रभात

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
Dhruvmemorial(suprabhat)
"मृत्यु - बोध " साँसों के रेशे जब खोल रहे होंगे मेरी देह से बंधी अंतिम गाँठ मेरा मन पकायेगा मेरी देह के चूल्हे पर सफ़र का अंतिम कलेवा और तुम भटकोगी प्रेम की गठरी सिर पर लिए दो देह लिप्त सभ्तायों के बिच, विवश उस निमिष अंतिम बार सुनूंगा मैं ... ... इन छप्परों पर से गुजरते परिंदों के झुण्ड का कलरव और याद आ जायेगा एक पिली शाम में उड़ता धानी आँचल विन्ध्य के बियाबानों में खोती एक आदिम कमंचे की धुन तेरे लिए चुराकर लाये मकई के हरे भुट्टे शायद ही मैं याद कर पाऊं जीवन भर के संग्राम मेरी असफलतायें रेत के निरर्थक टीलों पर मेरे अहम् का विजयघोष तुम देखना ... अविराम मेरी आँखों में ताकि सुन सको हमारे प्रणय का अंतिम गीत और मैं आत्मसात कर पाऊं विछोह की छाछ पर मक्खन बन उभर आई तेरी अम्लान छवि शायद वो अंतिम मंथन होगा हमारे सम्बन्धों का मेरी संततियों....! जब तुम रो पड़ोगे आदतन दांतों से नाख़ून कुतरते हुये मेरी चारपाई का उपरी पायदान पकड़ कर तब माफ़ कर देना अपने सर्जक को उसकी अक्षमता को शायद इस जीवन की निरंतरता का सत्य... ..........इसके अपूर्ण रह जाने में ही हैं जैसे वादन के बाद विराम उच्छ्वास के बाद निःश्वास तुम्हारी मान्यतायें मुझे मृत घोषित कर देगी देह की परिधियों पर और मैं भभक कर जी लूँगा अपनी मौत........................//
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
dhruv mamorel. चित्र विंडो थीम. Blogger द्वारा संचालित.